श्री शीतला चालीसा
दोहा
जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान। होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बलज्ञान॥
घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार। शीतल छइयां में झुलई, मइया पलना डार॥
चौपाई
जय-जय-जय शीतला भवानी, जय जग जननि सकल गुणखानी। गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित, पूरण शरदचंद्र समसाजित॥
विस्फोटक से जलत शरीरा, शीतल करत हरत सब पीरा। मातु शीतला तव शुभनामा, सबके गाढ़े आवहिं कामा॥
